मेजर उन्नीकृष्णन को पर्दे पर जीने वाले अदिवि सेष का देश के नाम खास संदेश, जानें क्या बोले एक्टर


नई दिल्ली: मेजर संदीप उन्नीकृष्णन उन कई शहीदों में से एक थे, जिन्होंने 2008 में 26/11 के ऑपरेशन के दौरान देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे. हो सकता है कि वह स्कूली पाठ्यपुस्तकों में दर्ज किए गए गुमनाम नायकों में से एक हों. लेकिन एक युवक जिसने अपने बारे में ऐसी ही एक पाठ्यपुस्तक में ‘अनसंग हीरोज’ नामक अध्याय में पढ़ा था, उसे अपने जीवन का मिशन बना लिया था, ताकि मेजर उन्नीकृष्णन को वह गौरव मिले जिसके वे हकदार थे. यह राजनेताओं की तुच्छता से परे था.

यह युवा अदिवि सेष का सपना था, जिन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षो को कैलिफोर्निया में बिताया था, यह सुनिश्चित करने के लिए कि मेजर उन्नीकृष्णन एक कृतज्ञ राष्ट्र के दिलों में हमेशा के लिए जीवित रहें. टॉलीवुड अभिनेता ने ऐसा तब किया जब उन्हें ऐसा करने का अवसर मिला. ऐसा तब हुआ, जब उन्हें इस साल मई में रिलीज हुई ‘मेजर’ नाम की बायोपिक में स्क्रिप्टिंग और एक्टिंग करने का मौका मिला.

मेजर उन्नीकृष्णन ने 28 नवंबर 2008 को अपने जीवन का बलिदान दिया और उन्हें गणतंत्र दिवस 2009 को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. अदिवि सेष ने कड़ी मेहनत के बाद और शहीद के माता-पिता तक पहुंचने के बाद ‘मेजर’ के पेशेवर और व्यक्तिगत ऑन-स्क्रीन कैरेक्टर को विकसित किया. यह एक ऐसा पवित्र बंधन था जिसे अभिनेता अभी भी संजोए हुए हैं.

सेष ने आईएएनएस को बताया, ‘मैं 26 तारीख को मुंबई जा रहा हूं और मैं स्मारक पर चाचा और अम्मा (मेजर उन्नीकृष्णन के माता-पिता) के साथ रहूंगा. मुझे लगता है कि मेजर संदीप सर मेरे लिए यही मायने रखते हैं, यही फिल्म मेरे लिए मायने रखती है और यही उन्होंने मेरे लिए किया. ‘मेजर’ ने मेरी जिंदगी बदल दी है और उन्होंने मेरी जिंदगी को आशीर्वाद दिया है. मैं इसे कभी नहीं भूलूंगा.’

अदिवि सेष ‘मेजर’ को पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों तरह से जीवन बदलने वाला अनुभव मानते हैं. अभिनेता ने कहा, ‘मुझे याद है कि सीबीएसई की पाठ्यपुस्तक में ‘अनसंग हीरोज’ नामक अध्याय में मेजर संदीप के बारे में पढ़ा था. यह एक ऐसा क्षण था कि हर कोई उनके नाम का गान करता था. यह मेरे लिए बहुत मायने रखता था.’

अदिवि सेष ने कहा, ‘मुझे लगता है कि उनके बलिदान को याद रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी महसूस करें कि हम सभी अपने देश के लिए कुछ कर सकते हैं और इसके बारे में सिर्फ 26/11 या 26 जनवरी या 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय अवकाश के बारे में नहीं सोचें. हमें जीने और काम करने के तरीके से अपने देश के बारे में सोचना है. यह कुछ ऐसा है जो मैंने मेजर की भूमिका निभाने से सीखा है और मुझे उम्मीद है कि देश भी ऐसा ही सोचेगा.’

Tags: Bollywood news, Major



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *