Bhediya Review: वरुण-कृति ही नहीं दीपक- अभिषेक ने भी किया कमाल, मैसेज भी देती हैं ‘भेड़िया’


फिल्म: भेड़िया

निर्देशक: अमर कौशिक

प्रमुख स्टार कास्ट: वरुण धवन, कृति सेनन, अभिषेक बनर्जी और दीपक डोबरियाल

कहां देखें: थिएटर

क्या है कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है और दिखता है कि रोड कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रेक्टर भास्कर (वरुण धवन), अरुणाचल प्रदेश जाते दिख रहा है। जिसे जीरो के घने जंगल के बीत से एक हाइवे बनाना है। भास्कर के साथ में उसका कजिन जनार्धन/जेडी (अभिषेक बनर्जी) और एक दोस्त जोमिन (पालिन कबक) है। तीनों लोकल ट्राइबल्स को मनाने के लिए जा रहे हैं, ताकि वो अपनी जमीन सरकार को दे दें और उस पर हाइवे बन सके। इस बीच उनके साथ एक हादसा होता है, जहां भास्कर को एक भेड़िया काट लेता है। इसके बाद धीरे धीरे भास्कर में भेड़िया के बदलाव आने लगते हैं और ‘विशाणु’ के बारे में बातें शुरू हो जाती हैं। इसके बाद भास्कर के सामने क्या चैलेंज होते हैं, वो ठीक होता है या नहीं…, इन सबके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

कैसी है एक्टिंग

फिल्म में वरुण धवन लीड रोल में हैं और उन्होंने बेहतरीन काम किया है। उन्हें हर फ्रेम में देखकर अच्छा लगता है। कॉमेडी ही नहीं इंटेंस सीन्स में भी वरुण ने माहौल बनाया है। इंसान से भेड़िया बनने के विजुअल्स एक ओर जहां डराते हैं तो दूसरी ओर एक्साइटिड भी करते हैं। कृति सेनन ने अपने किरदार के हिसाब से अच्छा काम किया है, हालांकि उनके किरदार में थोड़ी डेप्थ होती तो और अच्छा होता। लेकिन जितनी भी देर वो स्क्रीन पर नजर आती हैं, उन्हें देखकर अच्छा लगता है। अभिषेक बनर्जी ने बेहतरीन कॉमेडी की है और जच रहे हैं, उनके डायलॉग्स खूब हंसी दिलाते हैं। इन सभी के साथ में पांडा के किरदार में दीपिक दोबरियाल का एक्सेंट और बॉडी लैंग्वेज जमा है।

फर्स्ट हाफ में कॉमेडी और सेकेंड में है एक्शन

फिल्म का फर्स्ट हाफ एवरेज है और कॉमेडी ज्यादा है। वहीं फिल्म के दूसरे हाफ में एक्शन है। वहीं फिल्म कई कई जगहों पर स्लो नजर आती है और कुछ सीन्स को देखकर ऐसा लगता है कि इनकी जरूरत ही नहीं थी। लेकिन भेड़िया बना भास्कर और अभिषेक की कॉमेडी आपको बतौर दर्शक बांधे रखने में कामयाब दिखती है। फिल्म के निर्देशक अमर कौशिक हैं और एक बार फिर उन्होंने बढ़िया काम किया है। अमर को हॉरर और कॉमेडी मिक्स करने की ट्रिक बखूबी आती है, जो बिलकुल भी आसान काम नहीं है। फिल्म की स्टोरी निरेन भट्ट ने लिखी है और काफी सफाई से उन्होंने हर सीन को लिखा है, कैरेक्टर ग्रोथ, फनी क्लाइमैक्स और बिग रिवील के लिए उन्हें पूरे नंबर मिलते हैं। फिल्म में कुछ पुरानी हिंदी फिल्मों का भी जिक्र है, जिससे आप और कनेक्ट होते हैं। शहनाज गिल के फेमस डायलॉग- ‘क्या करूं मैं मर जाऊं’ का भी फिल्म में इस्तेमाल है, जिसे सुनकर दर्शक ताली पीटने लगते हैं। फिल्म में कुछ ऐसी लाइन्स भी हैं, जो हटाई जा सकती थीं, जैसे कि टॉयलेट ह्यूमर या फिर वो पूरा सीक्वेंस।

तकनीकि तौर पर कैसी है फिल्म

फिल्म के सिनेमैटोग्राफर जिष्णु भट्टाचार्जी है, जिन्होंने शानदार तरीके से जीरो के जंगल के सीन्स को कैप्चर किया है। भेड़िया एक विजुअल ट्रीट है, जो नॉर्थ ईस्ट इंडिया की खूबसूरती और प्रकृति को भी बखूबी दिखाती है। फिल्म के वीएफएक्स और स्पेशल इफेक्ट्स कमाल के हैं और कई हद तक इंडियन सिनेमा के सबसे बेस्ट भी। फिल्म में आदमी और जानवर के कॉन्फ्लिक्ट को संजीदगी से दिखाया गया है, जो सच में इम्प्रेस करता है। फिल्म में नॉर्थ ईस्ट के लोगों को चाइनीज या आउटसाइडर्स आदि कहने के मुद्दे पर भी बारीकी से बात है। फिल्म में एक स्ट्रॉन्ग डायलॉग है, ‘हिंदी में कमजोर होने से कम भारतीय नहीं होते हैं।’ एक्टिंग, डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी के साथ ही साथ फइल्म का म्यूजिक भी ठीक है। फिल्म का म्यूजिक सचिन-जिगर ने दिया है, लेकिन गानों में बेहतरी का स्कोप है, क्योंकि सभी गाने जुबां पर नहीं चढ़ते हैं। वहीं बैक ग्राउंड म्यूजिक कहानी को आगे बढ़ाने में सपोर्ट करता है।

देखें या नहीं:

वरुण धवन की फिल्म भेड़िया कुल मिलाकर एक ऐसी फिल्म है, जिसे आपको बड़े पर्दे पर एन्जॉय करना चाहिए। फिल्म विजुअली ट्रीट के साथ ही साथ मैसेज भी देती है, जो थिएटर से बाहर निकलते हुए भी आपके साथ रहता है।

(रिव्यू क्रेडिट: हिन्दुस्तान टाइम्स)

 



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