Dhokha Round D Corner Review: अपारशक्ति और खुशाली की मेहनत आई नजर, ‘धोखा- राउंड डी कॉर्नर’ में फीके दिखे माधवन, जानें देखें या नहीं फिल्म


फिल्म: धोखा- राउंड डी कॉर्नर
प्रमुख स्टारकास्ट:आर माधवन, अपारशक्ति खुराना, दर्शन कुमार और खुशाली कुमार  
निर्देशक:कूकी गुलाटी
कहां देखें: थिएटर्स

क्या है कहानी: फिल्म की कहानी यथार्थ सिन्हा (आर माधवन) और उनकी पत्नी सांची सिन्हा (खुशाली कुमार) के इर्द गिर्द घूमती है। यथार्थ और सांची एक नॉर्मल पति- पत्नी की तरह हैं, जिन में प्यार भी है और टकरार भी। दोनों की जिंदगी ठीक ठाक चल रही होती है, लेकिन तभी एक दिन आंतकवादी हक गुल (अपारशक्ति खुराना) तब उनके घर घुस जाता है, जब यथार्थ घर पर नहीं होता है। हक गुल को पकड़ने के लिए पुलिस अधिकारी मलिक (दर्शन कुमार) आता है। फिल्म की इस कहानी में अब कुछ ट्विस्ट हैं, जैसे सांची डिलूशनल डिसॉर्डर से ग्रसित है, सांची को मलिक पहले से कैसे जानता है, हक गुल कैसे सांची के ही फ्लैट में जाता है और क्या हक सच में आंतकवादी है भी? हक गुल आखिर में पकड़ा जाता है या नहीं…, क्या यथार्थ सिन्हा, सांची और मलिक का कोई और रंग भी सामने आता है…, ऐसे सवालों के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और क्या वाकई सच हमेशा झूठ से जीतता है?

क्या है खास:‘धोखा- राउंड डी कॉर्नर’ की शुरुआत एक गाने से होती है, जिसका कैमरा वर्क काफी इम्प्रेस करता है। गाने में बेहद खूबसूरती से एक लंबे पोर्शन को शॉर्ट में दिखा दिया जाता है। फिल्म को एडिटिंग टेबल पर भी अच्छा संभाला गया है और यही वजह है कि फिल्म को जबरन लंबा नहीं खींचा गया है और करीब 2 घंटे में ही फिल्म को समेट दिया गया है। फिल्म का न सिर्फ पहला गाना बल्कि आखिरी गाना ‘माही मेरा’ भी सिनेमैटिकली काफी उम्दा है, जिस में अपारशक्ति खुराना और खुशाली कुमार का प्यार और दर्द दिखता है। अरिजीत ने इस गाने में चार चांद लगाने का काम किया है। वहीं फिल्म का प्रमोशनल गाना ‘जूबी डूबी’ भी अच्छा डांस नंबर है।

कहां खाई है मात: फिल्म न सिर्फ कागजी तौर पर कमजोर लिखी गई है, बल्कि तकनीकी तौर पर भी फीकी साबित होती है। किसी भी फिल्म को अच्छा और बुरा बनाने के लिए उसके छोटे छोटे एलिमेंट्स का ध्यान रखा जाता है, लेकिन इस फिल्म को देखकर ऐसा महसूस नहीं होता है। बात सबसे पहले अगर एक्टिंग की करें तो आर माधवन तक उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं, जबकि वो एक जानदार एक्टर हैं। फिल्म में माधवन को देखकर ऐसा लगता है जैसे वो अपना किरदार खुद समझ ही नहीं पाए और सीधे शूट शुरू हो गया। वहीं अपारशक्ति खुराना की किरदार के लिए की गई मेहनत तो दिखती है, लेकिन वो रंग नहीं जमाती है। दर्शन कुमार से भी द कश्मीर फाइल्स के बाद जो उम्मीदे थीं, उस कसौटी पर वो खरा नहीं बैठते। इन तीनों के अलावा फिल्म से खुशाली कुमार का डेब्यू है और जब तक खुशाली के डायलॉग्स नहीं हैं, जब तक वो स्क्रीन पर जमती हैं, लेकिन डायलॉग्स बोलते ही समझ आता है कि उन्हें अभी और पकने की जरूरत है। फिल्म के डायलॉग्स और सिनेमैटोग्राफी काफी ज्यादा कमजोर है। थ्रिलर फिल्म देखते हुए भी कई बार खूब हंसी आती है कि आखिर क्या सोच कर इस सीन को लिखा गया होगा। फिल्म के निर्देशक कूकी गुलाटी हैं, जो इससे पहले प्रिंस और द बिग बुल जैसी फिल्में बना चुके हैं। हालांकि यहां पर वो भी हल्के ही दिखते हैं। पूरी फिल्म देखने के बाद ये भी समझ आता है कि फिल्म के कई सीन्स पर कोई रिसर्च ही नहीं की गई है।

देखें या नहीं: सीधे और सपाट शब्दों में कहें तो’धोखा: राउंड डी कॉर्नर’ को आप क्राइम पेट्रोल का एक महंगा वर्जन कह सकते हैं, जिस में आपको काफी हद तक पहले से ही पता होता है कि आगे क्या होने वाला है। फिल्म के आखिरी 10 मिनट को छोड़ दें तो उस में ऐसा कुछ भी बहुत अलग या अनोखा नहीं है, जिसे आपने पहले न देखा हो। ‘धोखा: राउंड डी कॉर्नर’ को ओटीटी पर देखा जा सकता है।

 



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