Explained: हिंदी फिल्मों में फिरंगियों की आमद से बॉलीवुड के देसी आर्टिस्ट क्यों है परेशान?


हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में विदेशों से आए कलाकार, तकनीशियन और जूनियर आर्टिस्ट का चलन बढ़ गया है. कंगना रनौत की फिल्म ‘धाकड़’ हो या आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ या फिर साल 1997 में आई कमल हासन की चाची 420. बॉलीवुड की इन फिल्मों में बेहतरीन तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ विदेशी कलाकारों या टेक्नीशियन का इस्तेमाल हुआ है. रणबीर कपूर-आलिया भट्ट स्टारर हालिया रिलीज ‘ब्रह्मास्त्र भी इसी लिस्ट में शामिल है. इन फिल्मों में आपने हैरत में डाल देने वाले एक्शन सीन्स, आंखों को भा जाने वाली फोटोग्राफी और कई अन्य उम्दा तकनीकी कलाकारी देखी होगी. दुनिया के अलग-अलग देशों के स्पेशियलिस्ट का बॉलीवुड की फिल्मों में इस्तेमाल सिनेमा के लिहाज से तो बेहतर है, मगर क्या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इससे खुश हैं?

पड़ोसी देश पाकिस्तान को छोड़ दें, तो बाकी दुनियाभर की हिस्सेदारी हिंदी फिल्मों में देखने को मिल रही है. पाकिस्तानी कलाकारों या तकनीशियन पहले बॉलीवुड का हिस्सा बनते रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों से जरूर इन पर बैन लग गया है. लेकिन विदेशी कलाकार या टेक्नीशियनों के बढ़ते चलन से अब फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को ‘तकलीफ’ होने लगी है. आईटी सेक्टर, टेलीकॉम या अन्य क्षेत्रों की तरह सिनेमा में विदेशी प्रतिभाओं की भागीदारी को फिल्म से विभिन्न एसोसिएशन खतरा मान रहे हैं. फिल्म से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय राजनीतिक दलों ने इस चलन पर अब आपत्ति उठानी शुरू कर दी है.

कलाकार से लेकर जूनियर आर्टिस्ट तक विदेशी

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FIRST PUBLISHED : September 12, 2022, 18:32 IST



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