Goodbye Review: कहानी में खा गई मात, अमिताभ बच्चन-रश्मिका मंदाना की एक्टिंग ने संभाली फिल्म


फिल्म: गुडबाय
कलाकार: अमिताभ बच्चन, रश्मिका मंदाना, नीना गुप्ता, पवैल गुलाटी, साहिल मेहरा, एली एवराम
निर्देशक: विकास बहल’

‘पुष्पा‘ फेम रश्मिका मंदाना का बॉलीवुड डेब्यू हो गया है। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘गुडबाय‘ (Goodbye) शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म में अमिताभ बच्चन और नीना गुप्ता अहम रोल में हैं। रश्मिका उनकी बेटी बनी होती हैं। फिल्म के ट्रेलर को काफी पसंद किया गया था। रश्मिका और अमिताभ के बीच ट्रेलर में जिस तरह बहस होती है उसे देखकर सोशल मीडिया पर यूजर्स को फिल्म ‘पीकू‘ की याद आ गई लेकिन क्या ‘गुडबाय‘ अपनी कहानी से वह कमाल दिखा पाती है। समीक्षा में जानिए कैसी है फिल्म।

 

क्या है कहानी

 

गायत्री भल्ला (नीना गुप्ता) अपने परिवार की मुखिया होती हैं। अचानक एक दिन उनका निधन हो जाता है। गायत्री का परिवार और उनके पति हरीश भल्ला (अमिताभ बच्चन) श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार का इंतजार करते हैं। इस बीच पड़ोसी महिलाएं यह सोचने में व्यस्त हैं कि वो गायत्री की याद में जो व्हाट्सएप ग्रुप बना रही हैं उसका नाम क्या रखें। ‘गॉन गायत्री गॉन‘, ‘लोनली हरीश जी‘, ‘हरीश जी नीड्स अस‘ इस तरह के कुछ नाम सुझाए जाते हैं। एक और नाम आता है ‘चंडीगढ़ बबली‘ क्योंकि गायत्री ने उनके ग्रुप को इसी नाम से पुकारा था। मृतक की मौत पर असंवेदनशीलता आगे भी जारी रहती है। फैमिली ड्रामा ना कहकर इसे फ्यूनरल ड्रामा कहना ज्यादा सही रहेगा। निर्देशक विकास बहल फिल्म के जरिए बहुत कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन कई खामियों के बीच कहानी फंसी दिखती है और अंतिम संस्कार से आगे यह नहीं बढ़ पाती।

स्क्रीनप्ले में खटकती है कमी


फिल्म का पहला हिस्सा देखते हुए यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि निर्देशक ने कहानी में क्या दिखाने की कोशिश की है। क्या यह परिवार के उधेड़बुन की कहानी है या एक बेटी की कहानी है जो पुराने और रूढ़िवादी रीति-रिवाजों को नहीं मानती? क्या यह चार भाई-बहनों की कहानी है जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे हुए हैं और अपनी मां की मौत पर एक साथ जुटे हैं? या फिर आस्था और विज्ञान की दुविधा के बीच फिल्म फंसी है? मौत पर जो रस्में निभाईं जाती हैं क्या यह उस पर व्यंग्य है? दुभाग्य से फिल्म इन सभी सवालों का सटीक उत्तर नहीं दे पाती। इसी विषय पर पिछले साल फिल्म ‘राम प्रसाद की तेहरवी‘ और ‘पगलैट‘ आई थी। कहा जा सकता है दोनों फिल्मों ने बेहद खूबसूरती के साथ एक मानक सेट किया है।

कैसा है कलाकारों का अभिनय


‘गुडबाय‘ एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है। फिल्म में ऐसे कई सीन आते हैं जो भावुक कर देने वाले हैं और दिल को छू जाते हैं। कुछ सीन आपकी आंखों में आंसू ला देंगे। यह स्क्रीनप्ले की कमी है कि भावुकता जल्दी ही खत्म हो जाती है। कलाकारों के अभिनय की बात करें तो अमिताभ बच्चन हर एक सीन को पूरी ईमानतारी और विश्वास के साथ करते दिखते हैं। पहली हिंदी फिल्म में रश्मिका निराश नहीं करतीं। उनकी डायलॉग डिलीवरी जबरदस्ती नहीं लगती। हालांकि कई मौकों पर वह और बेहतर हो सकती थीं। पवैल, साहिल और एली ने अपने रोल के साथ न्याय किया है। नीना गुप्ता फ्लैशबैक सीक्वेंस में एक फ्रेशनेस के साथ आती रहती हैं। स्क्रीन पर उनकी केमेस्ट्री अमिताभ बच्चन के साथ जमती है। और हां फिल्म में सुनील ग्रोवर भी हैं जो अंतिम संस्कार के वक्त पंडित के रूप में हैं।

देख सकते हैं फिल्म


‘गुडबाय‘ इमोशंस से भरी हुई फिल्म है। यह लंबे समय तक आपके अंदर टिकी नहीं रह पाती। फिल्म कॉमेडी जरूर है लेकिन कई हिस्सों में खामियां साफ तौर पर दिखती हैं। इन सब के बावजूद इसे एक बार देख सकते हैं।  

 



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