Guru Dutt Birth Anniversary: नायाब फिल्मकार थे गुरु दत्त, पहली फिल्म ‘बाजी’ हिट होने पर खरीदा था पंखा


गुरु दत्त (Guru Dutt) 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरू में जन्में गुरु दत्त हरफनमौला थे. वह एक्टर, कोरियोग्राफर, डायरेक्टर, राइटर, प्रोड्यूसर सब कुछ थे. गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था. गुरु को बचपन से एक्टिंग का शौक था. कोलकाता में पढ़ाई की और रोजी-रोटी के लिए एक कंपनी में टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी कर ली, लेकिन दिल नहीं लगा तो पुणे की राह पकड़ी.

कुछ अलग करने की चाह लिए वसंत कुमार पुणे चले आए. इनका मन शुरू से ही एक्टिंग में लगता था. 1945 में ‘प्रभात’ नामक फिल्म कंपनी में काम मिल गया. फिल्म ‘लाखारानी’ से काम करना शुरू किया. इसके ठीक एक साल बाद ‘हम एक हैं’ फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर और कोरियोग्राफर की जिम्मेदारी मिली. 1947 में कंपनी से कांट्रैक्ट खत्म हो गया. गुरु दत्त और देव आनंद  दोस्त थे. देव ने वादा किया था कि जब भी कभी फिल्म बनाएंगे तो उसके निर्देशक तुम ही होगे.

‘बाजी’ की सफलता के बाद सीलिंग फैन खरीदा था
देव आनंद ने वादा निभाया और गुरु दत्त ने फिल्म ‘बाजी’ बनाई. गुरु के डायरेक्शन में बनी फिल्म हिट रही. अपनी फिल्में हिट होने पर जहां दूसरे फिल्ममेकर लग्जरी सामान खरीदते हैं वहीं गुरु दत्त ने सीलिंग फैन खरीदा था. आज के दौर के लिए ये सुनना थोड़ा अचरज भरा हो सकता है, लेकिन 50-60 के दशक में छत पर टंगा पंखा एक लग्जरी आइटम माना जाता था. इसके बाद ‘जाल’ और ‘बाज’ बनाई जो फ्लॉप रही. फिल्म ‘बाज’ में पहली बार बतौर हीरो स्क्रीन पर आए. इसी बीच देव आनंद से मनमुटाव हो गया और अपनी खुद की कंपनी बना ली. अपने प्रोडक्शन के बैनर तले पहली फिल्म बनाई ‘आर-पार’ जिसे काफी पसंद किया गया.

गुरु दत्त की फिल्में देख फिल्म बनाना सीखते हैं लोग
इसके बाद तो गुरु दत्त रुके नहीं. ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’, ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’, ‘चौदहवीं का चांद’ जैसी शानदार फिल्में बनाई. ‘साहब बीबी और गुलाम’ की सफलता के बाद तो गुरु दत्त ने इतिहास रच दिया. इन कालजयी फिल्मों से आज भी लोग सीखते हैं.

हताशा में गुरु दत्त दुनिया से चले गए
कहते हैं कि गुरु दत्त हमेशा कुछ नया करने की तलाश में रहते थे. हर समय बेचैन रहते थे. उनके पास सब कुछ था, अगर कुछ उनके पास नहीं था तो वह था सुकून-चैन. वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियों की वजह से परिवार में कलह हुआ. उनकी पत्नी गीता दत्त बच्चों को लेकर अलग रहने लगी. एक समय ऐसा आया कि बुरी तरह परेशान गुरु दत्त खूब शराब पीने लगे और अपनी इहलीला खत्म कर ली. 10 अक्टूबर 1964 को उनका निधन हो गया था.

Tags: Birth anniversary, Bollywood



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