HBD: 50 से ज्यादा फिल्में करने के बाद भी इस गलती के चलते कभी ‘हीरो’ नहीं बन पाए दीपक तिजोरी


Happy B’day Deepak Tijori: दीपक तिजोरी (Deepak Tijori) का जन्म 28 अगस्त, 1961 को मुंबई में हुआ था. आज वह 61 साल के हो गए हैं. दीपक ने अपनी पढ़ाई मुंबई से पूरी की है उन्हें शुरू से ही अभिनय में रुचि थी. बताया जाता है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक थियेटर ग्रुप ज्वाइन कर लिया, जहां उनकी मुलाकात आशुतोष गोवारिकर, विपुल शाह और आमिर खान से हुई.

दो दशकों से अधिक फिल्म जगत में सक्रिय रहने वाले दीपक ने अपने करियर की शुरुआत 1988 की फिल्म ‘तेरा नाम मेरा नाम’ से की. वह ‘क्रोध, आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, खिलाड़ी, बेटा, जो जीता वही सिकंदर, अंजाम, फरेब, खामोश… खौफ की रात, दो लफ्जों की कहानी, आशिकी गुलाम, नाजायज, बादशाह’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुके हैं. लेकिन फिर भी उन्हें एक्टिंग की दुनिया में बड़ा नाम नहीं माना गया.

दीपक तिजोरी बॉलीवुड इंडस्ट्री के एक ऐसे कलाकार का नाम है, जिसने एक के बाद एक लगातार शानदार फिल्मों में काम किया. एक तरफ उन्होंने सनी देओल के साथ ‘क्रोध’ की तो दूसरी तरफ राहुल राय के साथ ‘आशिकी’. इन सुपरडुपर हिट फिल्मों तक ही उनका कारवा रुका नहीं, उन्होंने आमिर खान के साथ ‘जो जीता वही सिकंदर’ में शानदार अभिनय किया. ‘खिलाड़ी, गुलाम, बादशाह, कभी हां कभी ना’ जैसी फिल्में भी उनकी कलाकारी से सजी फिल्में हैं, इनसभी फिल्मों में उन्होंने सहायक अभिनेता के तौर पर काम किया.

सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर बेस्ट च्वाइस बने
इससे आप ये ना सोचिए कि उन्हें हीरो बनने का मौका नहीं मिला. साल 1993 में आई फिल्म ‘पहला नशा’ में उन्हें ये मौका मिला. इस फिल्म आमिर और शाहरुख भी नजर आए थे. दीपक के अपोजिट पूजा भट्ट और रवीना टंडन थीं. अच्छी खासी स्टारकास्ट होने के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गई.

कहा जाता है कि दीपक ने काम के मामले में कभी भी किसी प्रोजेक्ट को ना नहीं कहा. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भी बतौर साइड एक्टर की. उनकी पहली फिल्म ‘तेरा नाम मेरा नाम’ (1988) थी. इस फिल्म में उनका छोटा सा रोल था. इसके बाद भी उन्हें जो किरदार मिले वह उन्हें निभाते आए. इस तरह वह एक सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर बेस्ट च्वाइस बन चुके थे.

भारी पड़ा सपोर्टिंग रोल
साल 1994 में आई ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ की. इस फिल्म में सैफ अली खान और अक्षय कुमार लीड रोल में थे. ये एक मल्टी स्टारर फिल्म थी इसलिए यहां उनके लिए एक अच्छा मौका हो सकता था. उन्हें सैफ का रोल ऑफर हो सकता था. लेकिन उनकी इमेज उनपर भारी पड़ गई. जब ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ के लिए हीरो की तलाश हुई होगी तो फिल्म के लिए अक्षय कुमार और सैफ अली खान को फाइनल कर लिया गया. उस वक्त तक सैफ अपनी जगह बनाने में कामयाब हो चुके थे. अगर उस वक्त दीपक तिजोरी की इमेज साइड हीरो वाली ना होती तो आज दीपक भी टॉप लीग में शामिल होती.

निर्देशन में आजमाया हाथ
बता दें कि हीरो के तौर पर फ्लॉप रहने के बाद उन्होंने डायरेक्शन में कदम रखने की सोची. लेकिन यहां भी उनकी पारी कुछ खास नहीं रही. साल 2003 में बतौर डायरेक्टर उनकी पहली फिल्म बोल्ड कंटेंट के चलते विवादों में रही. इसके अलावा ‘टॉम डिक और हैरी’, ‘खामोशी-खौफ की एक रात’ भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई.



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