Shankar-Jaikishan : शंकर से किया वादा जब भूल गए थे जयकिशन, इनके बीच आई दरार पाटने का काम मोहम्मद रफी ने किया


नई दिल्ली: शंकर के नाम से प्रसिद्ध संगीतकार शंकर सिंह रघुवंशी की हाल ही में बर्थ एनिवर्सरी मनाई गई. इस मौके पर शंकर को तो संगीतप्रेमियों ने याद किया ही, साथ ही जयकिशन भी याद आए. कुछ नाम, जोड़ियां सिनेमा में ऐसी बनीं हैं कि जब भी किसी का एक का जिक्र होता है, दूसरे का होता ही है. ऐसी ही मशहूर जोड़ी थी शंकर-जयकिशन (Shankar-Jaikishan) की. 1949-1971 तक एक साथ काम करते हुए इस सफल संगीतकार जोड़ी ने कई खूबसूरत गीत रचे. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में इन्हें माना जाता है. इनकी दोस्ती की कहानी तो आपने खूब सुनी होगी, आज बताते हैं इनके अनबन की कहानी.

15 अक्टूबर 1922 को पंजाब में जन्मे शंकर सिंह रघुवंशी बचपन से ही तबला बजाने में रुचि थी. संगीत की शिक्षा लेने के बाद शंकर ने एक थिएटर ग्रुप में काम किया. इसी के साथ पृथ्वी थिएटर के सदस्य भी बने और वहां शंकर तबले की थाप पर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे. साथ ही नाटकों में छोटे-मोटे रोल भी प्ले करते थे. इसी दौर में जयकिशन भी बतौर संगीतकार अपनी जगह बनाने की कोशिश में जुटे थे. शंकर की सिफारिश पर ही जयकिशन को भी पृथ्वी थियेटर में हारमोनियम बजाने का काम मिल गया. दोनों की दोस्ती यहीं परवान चढ़ी.

 ‘बरसात’ से हुई थी शंकर-जयकिशन  के संगीतमय सफर की शुरुआत
हिंदी सिनेमा के शो मैन राज कपूर अपनी फिल्म ‘बरसात’ के लिए संगीतकार की तलाश कर रहे थे. शंकर-जयकिशन से मिले और इनके संगीत से काफी प्रभावित हुए. इस तरह फिल्म ‘बरसात’ में संगीत देने के साथ ही इनके संगीतमय जोड़ी के सफर की शुरुआत हो गई. इस जोड़ी ने ‘जिया बेकरार है’ और ‘बरसात में हमसे मिले तुम सजन’ जैसे गीतों को कमाल के संगीत से सुपरहिट करवा दिया. इस फिल्म की कामयाबी से राज कपूर को तो फायदा हुआ ही,शंकर-जयकिशन की जोड़ी भी हिंदी सिनेमा को मिल गई. इस जोड़ी ने एक साथ कई फिल्मों को अपने संगीत से सुपरहिट करवाया.

(फोटो साभार: Film History Pics/twitter)

‘संगम’ के एक गाने को लेकर हो गई थी अनबन
राज कपूर की ही फिल्म ‘संगम’ के दौरान ही शंकर और जयकिशन के बीच वादाखिलाफी को लेकर अनबन हो गई थी. इस फिल्म के सभी गाने एक से बढ़कर एक हैं. चाहे ‘बोल राधा बोल हो’ या ‘दोस्त दोस्त ना रहा’ हो. इन गीतों को भला संगीतप्रेमी कैसे भूल सकते हैं.ऐसा ही एक गीत है  ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज न होना’ . कहते हैं कि शंकर और जयकिशन ने एक दूसरे से वादा किया था कि वह कभी किसी को नहीं बताएंगे कि धुन किसने बनाई है.

शंकर से किया वादा जयकिशन ने तोड़ दिया था
दरअसल, शंकर और जयकिशन अपनी धुन अलग-अलग बनाते थे, पर इनके बीच एक समझौता था कि कोई भी सार्वजनिक रुप से प्रकट नहीं करेगा कि कौन सी धुन किसकी है. लेकिन जयकिशन इस वादे को भूल गए और मशहूर फिल्म मैगजीन ‘फिल्मफेयर’ को एक इंटरव्यू के दौरान बता दिया कि ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज न होना’ गाने की धुन उन्होंने बनाई थी. शंकर इससे  नाराज हो गए थे और इनके संबंधों में दरार की शुरुआत हो गई थी. बाद में मोहम्मद रफी ने अपनी कोशिश से इनके बीच के मतभेद को कुछ हद तक कम किया.

Tags: Bollywood celebrities, Entertainment Special, Mohammad Rafi



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